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ममता का कत्ल: जिस मां की गोद में सुकून था, उसी ने गर्दन पर चलाया चाकू!

कलयुगी मां का खूनी तांडव: 6 साल के मासूम की गला रेतकर हत्या, खुद को भी किया लहूलुहान।

अजीत मिश्रा (खोजी)

कलयुगी मां का खूनी खेल: जिस आंचल में सुकून मिलता था, वहीं बेटे को मिली मौत की नींद

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  •  रक्षक ही बनी भक्षक, मासूम प्रभव की सांसें छीन मां ने रची खौफनाक साजिश। हरदी खास गांव में ममता हुई शर्मसार, बेटे के खून से रंगे मां के हाथ।
  • मां, मेरी खता क्या थी? निर्दयी मां ने उजाड़ा अपना ही सुहाग और गोद, गांव में पसरा मातम। सात साल का रिश्ता, छह साल का बेटा और एक खौफनाक अंत!
  • पत्थर दिल मां: मासूम चीखता रहा और मां रेतती रही गला, रूह कंपा देने वाली वारदात। क्रूरता की हद: कप्तानगंज में मां ने अपने ही लाल को उतारा मौत के घाट, हालत गंभीर।
  •  हरदी खास गांव में खूनी खेल, मां ने बेटे की हत्या कर खुदकुशी का किया प्रयास। आखिर क्यों ‘काल’ बन गई मां? पुलिस तलाश रही कत्ल के पीछे की अनसुलझी पहेली।

बस्ती/ब्यूरो: ममता शर्मसार है, इंसानियत लहूलुहान है और हरदी खास गांव की फिजाओं में सिर्फ चीखें और सन्नाटा है। जिस मां को कुदरत ने ‘जीवनदायिनी’ का दर्जा दिया, उसी ने यमराज बनकर अपने छह साल के मासूम की सांसों की डोर बेरहमी से काट दी। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के दुबौला चौकी अंतर्गत हरदी खास गांव में घटी इस खौफनाक वारदात ने न केवल बस्ती मंडल बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।

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मासूम की गर्दन पर ममता का ‘प्रहार’

संदीप सिंह की पत्नी कीर्ति ने शनिवार को वह किया जिसे सुनकर पत्थर दिल भी रो पड़ें। अपने कलेजे के टुकड़े, 6 वर्षीय प्रभव को गोद में बिठाकर दुलारने के बजाय, कीर्ति ने धारदार हथियार से उसका गला रेत दिया। मासूम प्रभव को संभलने तक का मौका नहीं मिला। जिस मां की उंगली पकड़कर उसने चलना सीखा था, उसी मां के हाथों का वार उसकी मौत का सबब बन गया। हत्या इतनी वीभत्स थी कि कमरे की दीवारें मासूम के खून से लाल हो गईं।

हत्या के बाद खुदकुशी का ‘ड्रामा’ या आत्मग्लानि?

वारदात को अंजाम देने के बाद कीर्ति ने खुद को भी चाकू मारकर लहूलुहान कर लिया। चीख-पुकार सुनकर जब ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर उनकी रूह कांप गई। एक तरफ मासूम प्रभव का निर्जीव शरीर पड़ा था, तो दूसरी तरफ उसकी ‘कातिल मां’ तड़प रही थी। आनन-फानन में पुलिस ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या अस्पताल से बच निकलने के बाद वह अपने जमीर के सवालों से बच पाएगी?

आखिर क्यों उजड़ा हंसता-खेलता परिवार?

संदीप और कीर्ति की शादी को सात साल हुए थे। सात सालों का सफर और छह साल का बेटा—सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर कौन सी नफरत या मानसिक विकृति पनप रही थी, यह अब भी रहस्य है।

  • क्या यह किसी घरेलू कलह का नतीजा है?
  • या फिर यह किसी गहरे मानसिक अवसाद की चरम सीमा है?

सनसनी में डूबा हरदी खास

घटना के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा है। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है— “कोई मां इतनी पत्थरदिल कैसे हो सकती है?” पुलिस के आला अधिकारी मौके पर डटे हुए हैं, साक्ष्य बटोरे जा रहे हैं और परिजनों से पूछताछ जारी है। कप्तानगंज पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस “कत्ल-ए-मासूम” की असली वजह सामने आ जाएगी।

ब्यूरो की कलम से: समाज में बढ़ता तनाव और रिश्तों में आती दरारें आज इस कदर हावी हो गई हैं कि एक मां अपने ही बच्चे की जल्लाद बन बैठी। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सामाजिक ढांचे की हार है। दोषी को ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि आने वाली पीढ़ियां ‘ममता’ के इस अपमान को याद कर कांप उठें।

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